
बुधवार की मध्य रात्रि में बीबी जसप्रीत कौर पटियालावाले की ‘महिमा साधु संग की सुनहु हो मेरे मीता, जय जयकार करे सब सोई’, (साधु की संगत की महिमा का बखान करने वाला गीत) शबद की स्वर लहरी गूंज उठी. उन्होंने वाहे गुरु का सिमरन-जाप किया, तो हजारों लोगों ने उनके सुर में सुर मिला सुखद, भक्तिपूर्ण व अलौकिक माहौल बना दिया. वहीं शहर में पहली बार ऐसा हुआ कि 10 वर्ष से कम उम्र के भुजंगियों (बालक-बालिकाओं) ने बड़े ही उत्साह साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब पर पुष्प वर्षा कर नये साल में प्रवेश किया.
साकची गुरुद्वारा मैदान में इस अवसर श्री दरबार साहिब तरनतारन के हेड ग्रंथी ज्ञानी जजबीर सिंह ने सच्चे भक्त के गुणों का बखान करते हुए कहा कि वह भले ही ताकतवर, विद्वान, बलशाली, धन, वैभव, भौतिक साधनों से परिपूर्ण रहता है, परंतु वह हमेशा हाम्रो सेवा, सत्कार, सहयोग जैसी भावना से परिपूर्ण होता है. उन्होंने श्री गुरु गोविंद सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस दुनिया में अनेक कौतक किये, परंतु खुद को परमेश्वर का दास बताया, सिखों में यहीं गुण होने चाहिए,
