
पिछले चार दिनों से मजदूर काम नहीं मिलने से लौट रहे हैं. दरअसल बिल्डिंग मेटेरियल ढुलाई करनेवाले वाहन चालक पुलिस- प्रशासन द्वारा परेशान किए जाने से नाराज हैं और बीते रविवार से हड़ताल पर चले गए हैं. जिससे बिल्डिंग मेटेरियल का ढुलाई ठप्प पड़ गया है. जिससे न केवल निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है बल्कि मजदूरी नहीं मिलने से रोजगार भी प्रभावित हो रहा है. वाहन चालकों का आरोप है कि स्टॉक से बालू- गिट्टी उठाव करने पर पुलिस द्वारा चालान की मांग की जाती है नहीं दिखाने पर भारी- भरकम जुर्माना और गाड़ी जप्त कर लिया जाता है जबकि सप्लायर द्वारा विभाग को चालान देकर माल लाया जाता है. सप्लायर एक ही माल के बदले दो दो चालान क्यों दे इसके लिए प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था करें अन्यथा माल ढुलाई नहीं करेंगे. उधर डीसी ने खनन विभाग को मामले में संज्ञान लेते हुए एसओपी तैयार करने का निर्देश दिया है. अब सवाल ये है कि आखिर कबतक एसओपी तैयार होता है और कब बिहारी मजदूरों को रोजगार मिलता है. फिलहाल भवन निर्माण कार्य से जुड़े दिहाड़ी मजदूर भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं. बता दे कि शहर में इस हड़ताल से करीब एक लाख दिहाड़ी मजदूर और बिल्डिंग मटेरियल ढुलाई में लगे चालक- खलासी प्रभावित हुए हैं. साथ ही कई निर्माण कार्य ठप्प पड़ गया है.
