
जमशेदपुर में क्षत्रिय करणी सेना ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि ये नियम सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकते हैं। क्षत्रिय करणी सेना की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजा गया है, जिसकी प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजी गई है। पत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जनवरी 2026 में जारी UGC को तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। संगठन का कहना है कि 15 जनवरी 2026 को राजपत्र में अधिसूचित ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर लागू किए गए हैं, लेकिन इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर गंभीर संवैधानिक और कानूनी प्रश्न खड़े होते हैं। पत्र में मांग की गई है कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए यानी रोलबैक किया जाए, ताकि आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधानों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। क्षत्रिय करणी सेना ने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस मामले में सभी पक्षों से चर्चा कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे उच्च शिक्षा में समानता के साथ-साथ वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकार भी सुरक्षित रह सकें।
