
इस दौरान मोर्चा ने झारखंड सरकार और राज्य के आदिवासी विधायक एवं मंत्रियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली और खूब खरी खोटी सुनाई. मोर्चा ने राज्य के आदिवासी विधायकों और मंत्रियों से आदिवासी हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया. मोर्चा ने बताया कि जिस उद्देश्य के साथ राज्य गठन का सपना साकार हुआ आज झारखंड की अबुआ सरकार उसे साजिश के तहत पूरा होने नहीं देना चाह रही है. राज्य के आदिवासी मुख्यमंत्री, मंत्री और आदिवासी विधायक चंद पूंजीपतियों के हाथों में आदिवासी अस्मिता का सौदा कर बैठे हैं. साजिश के तहत यहां के जल जंगल और जमीन का सौदा कर रहे हैं. राज्य में पेसा कानून अब तक लागू नहीं किया गया है जो सरकार की नाकामी बता रही है. यहां के आदिवासी अपने अधिकार के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं. इन्होंने साफ चेतावनी दिया है कि यदि सरकार आदिवासियों के मान-सम्मान और टाटा लीज नवीनीकरण में सम्मानजनक समझौता नहीं करती है तो आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा.
