
फांसी पर चढ़ जाऊंगा, लेकिन माफी नहीं मांगूंगा” : जयराम महतो का पुलिस एसोसिएशन को खुला चैलेंज
बरवाअड्डा थाना मामले में केस दर्ज होने के बाद विधायक का पलटवार..
विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित कार्रवाई की मांग.
बरवाअड्डा थाना परिसर में हुए विवाद और विधायक जयराम महतो के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग किए जाने के बाद अब डुमरी विधायक जयराम महतो ने कड़ा पलटवार किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे फांसी पर चढ़ जाएंगे, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे।
जयराम महतो ने पुलिस एसोसिएशन पर जमकर निशाना साधते हुए भ्रष्ट पदाधिकारियों के खिलाफ भी खुलकर आवाज उठाने की बात कही। उन्होंने डीसी, एसपी समेत अन्य अधिकारियों की बात करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वे किसी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।
दरअसल, बरवाअड्डा थाना परिसर में कथित मारपीट, गाली-गलौज और हाजत में बंद एक आरोपित को जबरन छुड़ाने के आरोप में विधायक जयराम महतो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने बरवाअड्डा थाना प्रभारी के समर्थन में मोर्चा खोलते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और विधायक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की थी।
लेकिन अब जयराम महतो ने साफ कर दिया है कि वे माफी मांगने वाले नहीं हैं। विधायक का कहना है कि यदि उन्हें अपनी बात और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत चुकानी पड़ी, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं।
इस पूरे विवाद के बीच विधायक जयराम महतो ने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को एक लंबा पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि वे विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं और सदन के प्रत्येक सदस्य की गरिमा, प्रतिष्ठा और अधिकारों की रक्षा करना विधानसभा अध्यक्ष का संवैधानिक दायित्व है।
जयराम महतो ने पत्र में स्पष्ट किया है कि वे खुद को कानून से ऊपर नहीं मानते और न ही किसी विशेष संरक्षण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई गंभीर अपराध किया गया है और उसके पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो कानून को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करना चाहिए।
हालांकि विधायक ने सवाल उठाया है कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के खिलाफ बिना पर्याप्त तथ्य और प्राथमिक जांच के केवल आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर दी जानी चाहिए।
पत्र में बरवाअड्डा थाना परिसर की 21 अगस्त की घटना का जिक्र करते हुए जयराम महतो ने दावा किया है कि वे गणेश दास नामक एक व्यक्ति को पुलिस हिरासत में कथित रूप से मारपीट किए जाने की सूचना मिलने पर थाना पहुंचे थे। विधायक के अनुसार, उन्होंने थाना प्रभारी से केवल इतना कहा था कि यदि व्यक्ति ने कोई अपराध किया है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, लेकिन हिरासत में मारपीट क्यों की गई, इसकी जानकारी दी जाए।
विधायक ने दावा किया है कि उन्होंने न तो आरोपी को छोड़ने के लिए कहा और न ही किसी कानूनी कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि घटना थाना परिसर में हुई थी, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। ऐसे में उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जयराम महतो ने पत्र में अपने खिलाफ पूर्व में दर्ज अन्य मामलों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई मामलों में बिना पर्याप्त सत्यापन और तथ्यों की समुचित जांच किए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
विधायक ने सवाल उठाया है कि जब अन्य जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में प्राथमिक जांच की जाती है, तो उनके मामले में समान प्रक्रिया और निष्पक्षता क्यों नहीं अपनाई जाती।
जयराम महतो ने विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उनकी मांग किसी विशेष छूट या कानून से ऊपर होने की नहीं है, बल्कि उनके साथ भी न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए।
अब विधायक के “फांसी पर चढ़ जाऊंगा, लेकिन माफी नहीं मांगूंगा” वाले बयान और विधानसभा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र के बाद यह विवाद और गहराता नजर आ रहा है। एक तरफ पुलिस एसोसिएशन विधायक से माफी की मांग पर अड़ा है, तो दूसरी तरफ जयराम महतो ने साफ कर दिया है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर और गरमा सकता है।