सरायकेला जिले में पिछले 24 घंटों से हो रहे रुक- रुक कर बारिश के कारण जनजीवन अस्त- व्यस्त हो गया है. बारिश के साथ तेज हवाओं ने जहां सिहरन बढ़ दी है, वहीं जिले में बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है.
जिले से होकर गुजरनेवाली प्रमुख नदियों के जलस्तर में तेजी से बढोत्तरी हो रही है. जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. उधर विभागीय उदासीनता के कारण एकबार फिर से सरायकेला सिविल कोर्ट टापू में तब्दील हो गया है. शनिवार को कोर्ट में न्यायिक कार्य कैसे होंगे यह चिंता का विषय है. बता दें कि जिला बार एसोसिएशन और नगर पंचायत के उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी की मांग पर पिछले साल उपयुक्त ने सिविल कोर्ट में होनेवाले जलजमाव को दुरुस्त करने का जिम्मा भवन निर्माण विभाग को दिया था. इसका प्राक्कलन बना और काम शुरू हुआ, मगर डीपीआर में त्रुटि और काम की धीमी गति के कारण बारिश होते ही जिला कोर्ट फिर से टापू में तब्दील हो गया है. शनिवार को कोर्ट परिसर में फिर से जलजमाव देख नगर पंचायत के उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने सीधे- सीधे विभागीय अधिकारी को जिम्मेदार ठहराते हुए कठोर कार्रवाई की मांग उपयुक्त से किये जाने की बात कही है. उन्होंने विभाग पर गलत डीपीआर बनाकर काम करने और धीमी गति से काम करने का आरोप लगाया है. श्री चौधरी ने बताया कि कोर्ट परिसर में जलजमाव की समस्या को देखते हुए परिसर को ऊंचा किया जाना है, लेकिन भवन निर्माण विभाग द्वारा प्राक्कलन में परिसर को ऊंचा करने से संबंधित किसी प्रकार की योजना नहीं है. इस अनुपयोगी प्राक्कलन (DPR) व भवन विभाग के अभियंताओं की लापरवाही से सरायकेला सिविल कोर्ट जैसा महत्वपूर्ण संस्थान का तालाब में तब्दील होना बेहद शर्मनाक है. श्री चौधरी ने उपायुक्त से भवन विभाग के संबंधित लापरवाह अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
