बोकारो की बेटी का विज्ञान में बड़ा कमाल, कैंसर इलाज के लिए विकसित की ‘स्मार्ट मेडिसिन

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झारखंड के बोकारो की बेटी ने विज्ञान की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरे राज्य को गर्व है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में एक नई उम्मीद जगी है। बोकारो की युवा शोधकर्ता काजोल और उनकी टीम ने एक ऐसी “स्मार्ट मेडिसिन” विकसित की है, जो कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है और शरीर के स्वस्थ अंगों को कम से कम नुकसान पहुंचाती है। उनकी यह महत्वपूर्ण रिसर्च दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ACS Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित हुई है।

कैंसर के इलाज में लंबे समय से सिस्प्लैटिन दवा का इस्तेमाल किया जाता है। यह दवा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में कारगर है, लेकिन इसके गंभीर दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं। कई मरीजों को किडनी डैमेज, नसों में तेज दर्द और अन्य जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि यह दवा कैंसर के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है।

इसी चुनौती का समाधान खोजने के लिए बोकारो की बेटी काजोल और उनकी रिसर्च टीम ने “सिस्प्रोप्लैटिन यानी CPP” नाम की नई स्मार्ट दवा विकसित की है।
इस दवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर में सफर के दौरान पूरी तरह निष्क्रिय रहती है। यानी जब तक यह ट्यूमर तक नहीं पहुंचती, तब तक स्वस्थ अंगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।

जैसे ही CPP ट्यूमर के विशेष वातावरण में पहुंचती है, यह स्वतः सक्रिय हो जाती है और दो महत्वपूर्ण तत्व रिलीज़ करती है। पहला कैंसर से लड़ने वाला सक्रिय एजेंट और दूसरा प्रोबेनेसिड, जो किडनी और नसों को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। यानी एक ही दवा कैंसर पर हमला भी करती है और शरीर की सुरक्षा भी करती है।

लैब परीक्षणों में इस नई दवा ने ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर जैसे बेहद आक्रामक कैंसर पर सकारात्मक परिणाम दिए हैं। शुरुआती शोध में यह भी सामने आया है कि इससे किडनी और नर्व टॉक्सिसिटी पहले की तुलना में काफी कम हुई है।
हालांकि यह रिसर्च अभी प्रयोगशाला स्तर पर है और इसे मरीजों के इलाज में शामिल करने से पहले कई चरणों के क्लिनिकल परीक्षण बाकी हैं, लेकिन वैज्ञानिक इसे भविष्य की कैंसर थेरेपी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

काजोल ने अपनी शुरुआती शिक्षा श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल, बोकारो से पूरी की। इसके बाद बोकारो स्टील सिटी कॉलेज से बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक किया। वर्तमान में वह IISER ब्रह्मपुर, ओडिशा में अगली पीढ़ी की कैंसर थेरेपी पर शोध कर रही हैं।

बोकारो की बेटी की यह उपलब्धि सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। अगर आगे के शोध और क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं, तो भविष्य में कैंसर का इलाज पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, प्रभावी और कम दर्दनाक हो सकता हैझारखंड के बोकारो की बेटी ने विज्ञान की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरे राज्य को गर्व है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में एक नई उम्मीद जगी है। बोकारो की युवा शोधकर्ता काजोल और उनकी टीम ने एक ऐसी “स्मार्ट मेडिसिन” विकसित की है, जो कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है और शरीर के स्वस्थ अंगों को कम से कम नुकसान पहुंचाती है। उनकी यह महत्वपूर्ण रिसर्च दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ACS Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित हुई है।कैंसर के इलाज में लंबे समय से सिस्प्लैटिन दवा का इस्तेमाल किया जाता है। यह दवा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में कारगर है, लेकिन इसके गंभीर दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं। कई मरीजों को किडनी डैमेज, नसों में तेज दर्द और अन्य जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि यह दवा कैंसर के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है।इसी चुनौती का समाधान खोजने के लिए बोकारो की बेटी काजोल और उनकी रिसर्च टीम ने “सिस्प्रोप्लैटिन यानी CPP” नाम की नई स्मार्ट दवा विकसित की है।इस दवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर में सफर के दौरान पूरी तरह निष्क्रिय रहती है। यानी जब तक यह ट्यूमर तक नहीं पहुंचती, तब तक स्वस्थ अंगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।जैसे ही CPP ट्यूमर के विशेष वातावरण में पहुंचती है, यह स्वतः सक्रिय हो जाती है और दो महत्वपूर्ण तत्व रिलीज़ करती है। पहला कैंसर से लड़ने वाला सक्रिय एजेंट और दूसरा प्रोबेनेसिड, जो किडनी और नसों को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है। यानी एक ही दवा कैंसर पर हमला भी करती है और शरीर की सुरक्षा भी करती है।लैब परीक्षणों में इस नई दवा ने ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर जैसे बेहद आक्रामक कैंसर पर सकारात्मक परिणाम दिए हैं। शुरुआती शोध में यह भी सामने आया है कि इससे किडनी और नर्व टॉक्सिसिटी पहले की तुलना में काफी कम हुई है।हालांकि यह रिसर्च अभी प्रयोगशाला स्तर पर है और इसे मरीजों के इलाज में शामिल करने से पहले कई चरणों के क्लिनिकल परीक्षण बाकी हैं, लेकिन वैज्ञानिक इसे भविष्य की कैंसर थेरेपी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।काजोल ने अपनी शुरुआती शिक्षा श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल, बोकारो से पूरी की। इसके बाद बोकारो स्टील सिटी कॉलेज से बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक किया। वर्तमान में वह IISER ब्रह्मपुर, ओडिशा में अगली पीढ़ी की कैंसर थेरेपी पर शोध कर रही हैं।बोकारो की बेटी की यह उपलब्धि सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। अगर आगे के शोध और क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं, तो भविष्य में कैंसर का इलाज पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, प्रभावी और कम दर्दनाक हो सकता है।

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