
जमशेदपुर : प्रखंड कार्यालय परिसर मंगलवार को पंचायत जनप्रतिनिधियों के नारों से गूंज उठा. पंचायत समिति सदस्य संघ ने प्रखंड प्रमुख पानी सोरेन के नेतृत्व में विशाल धरना प्रदर्शन किया. जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रखंड प्रशासन और पंचायत सचिवों की मिलीभगत के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था पंगु हो गई है. प्रखंड प्रमुख ने कहा कि कार्यकाल के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी सदस्यों की बातों को अनसुनी किया जा रहा है. उन्होंने बीडीओ (BDO) पर मनमानी करने और जनहित के मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालने का गंभीर आरोप लगाया.
धरना दे रहे सदस्यों ने बताया कि पंचायत सचिवों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से तानाशाही हो गई है. नवनियुक्त सचिव प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते और न ही पंचायत स्तरीय विकास कार्यों की जानकारी सदस्यों को देते हैं. जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जारी करने में जानबूझकर विलंब किया जाता है. सदस्यों का कहना है कि प्रखंड प्रशासन उनके साथ न्यायसंगत व्यवहार नहीं कर रहा है, जिससे वे अपने क्षेत्र की जनता को जवाब देने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों ने बैठकों की खानापूर्ति पर भी सवाल उठाए. आरोप है कि पंचायत समिति की मासिक बैठकों में लिए गए निर्णयों और पारित प्रस्तावों पर प्रखंड कार्यालय कोई संज्ञान नहीं लेता. प्रोसिडिंग (कार्यवाही) को संबंधित विभागों तक नहीं भेजा जाता है. इसके अलावा, श्रम विभाग, दूरसंचार विभाग और ग्रामीण विकास पथ प्रमंडल जैसे महत्वपूर्ण विभागों के पदाधिकारी बैठकों में शामिल नहीं होते, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की कोई ठोस जानकारी प्रतिनिधियों तक नहीं पहुंच पा रही है.
प्रदर्शन के दौरान भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला भी सामने आया. प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय में जाति, आय, आवासीय और जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर कर्मचारियों द्वारा खुलेआम रिश्वत ली जा रही है. जो लोग पैसे देते हैं, उनके प्रमाण पत्र तुरंत निर्गत कर दिए जाते हैं, जबकि आम जनता और गरीब ग्रामीणों को हफ्तों तक दौड़ाया जाता है. सदस्यों ने इस पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
प्रखंड प्रमुख ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि इससे पहले भी इन समस्याओं को लेकर उपायुक्त को अवगत कराया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. उन्होंने कहा कि पंचायत समिति सदस्यों के हक और अधिकारों का पिछले चार वर्षों से हनन किया जा रहा है. यदि प्रशासन ने इस बार उनकी 9 सूत्री मांगों पर ठोस पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में पूरा प्रतिनिधिमंडल सड़कों पर उतरकर प्रखंड कार्यालय के कामकाज को पूरी तरह ठप कर देगा.
