
छपरा।सारण जिले में बेटियों के द्वारा अपनी मां की अर्थी को कंधा देने और उनका दाह संस्कार की घटना सामने आई है।यह घटना मढ़ौरा प्रखंड के जवईनियां गांव में हुई है सामाजिक संवेदनहीनता की मार्मिक घटना सामने आई है। यहां के निवासी स्व. रविन्द्र सिंह की पत्नी बबीता देवी की 30 जनवरी को पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे पहले डेढ़ वर्ष पूर्व पति का निधन हो चुका था। मां की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। इनके कोई भी पुत्र नहीं होने के कारण मुखाग्नि देने वाला भी कोई नहीं था।
वही अंतिम संस्कार के दिन न तो रिश्तेदार पहुंचे और न ही गांव के लोग आगे आए। शव घंटों दरवाजे पर पड़ा रहा। मजबूरी में दोनों बेटियों ने ही मां की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि भी दी। काफी देर बाद दो-तीन लोगों के सहयोग से अंतिम संस्कार हो सका।वही दोनों बेटी मौसम सिंह और रौशन सिंह ने बताया कि इलाज में सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी है। अब मां के श्राद्ध संस्कार के लिए संसाधन नहीं हैं। परंपराओं के कारण बेटियां स्वयं क्रिया-कर्म नहीं कर पा रहीं।
ऐसे में दोनों बहनें समाज और रिश्तेदारों से मदद की गुहार लगा रही हैं।लेकिन कोई भी रिश्तेदार और समाज के लोग इन बच्चियों के मिन्नतों के बाद भी दाह संस्कार और शव यात्रा में शामिल नहीं हुए और न ही आगे आए।बाद में इन बच्चियों ने स्वयं दाह संस्कार का फैसला लिया।और शव को लेकर श्मशान घाट की ओर चली।यह घटना समाज के उस चेहरे को उजागर करती है, जहां गरीब की पीड़ा अक्सर अनदेखी रह जाती है। हालांकि गरीबी के कारण इनके पास पैसे की कमी रही और इन बच्चियों ने जैसे तेसे अंतिम संस्कार तो कर दिया है।लेकिन तेरहवीं के पैसे नहीं है।अब देखना है कोई सामाजिक संस्था या प्रशासन इनकी मदद करता है या नहीं।
