
जमशेदपुर के सोनारी थाना क्षेत्र स्थित दास बस्ती में सोमवार को जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई उस जमीन को लेकर की जा रही है, जिस पर कथित रूप से एक बिल्डर द्वारा बिना जमीन मालिक की अनुमति के अवैध निर्माण कर बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी गई थी। यह विवाद लंबे समय से अदालत में लंबित था और करीब 24 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने जमीन के असली मालिक बिनोद दास और उनके परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया।
भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कार्रवाई
अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए थे। सुबह से ही प्रशासन की टीम ने इलाके को घेराबंदी कर अवैध निर्माण को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी शुरू की गई ताकि जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके।
किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। प्रशासन की मौजूदगी में एक-एक कर अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
कुछ लोगों ने जताया विरोध
कार्रवाई के दौरान कुछ अन्य लोग भी सामने आए जिन्होंने दावा किया कि सरकारी नापी में गड़बड़ी हुई है और उनकी जमीन को भी गलत तरीके से खाली कराया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश की। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है और सभी प्रक्रियाएं कानूनी रूप से पूरी की गई हैं।
प्रशासन ने इन दावों को फिलहाल अमान्य मानते हुए कार्रवाई जारी रखी और अतिक्रमण हटाने का काम नहीं रोका गया।
पीड़ित परिवार को मिली राहत
करीब 24 वर्षों से न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे बिनोद दास और उनके परिवार के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। लंबे इंतजार के बाद अदालत का फैसला उनके पक्ष में आने से परिवार में संतोष का माहौल है। प्रशासन अब जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर असली मालिक को कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है।
भू-माफियाओं और अवैध बिल्डरों के लिए संदेश
इस कार्रवाई को शहर में अवैध कब्जा और बिना अनुमति निर्माण करने वालों के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के अनुसार शहर में जहां भी इस तरह के मामले सामने आएंगे, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।
24 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई ने यह साबित कर दिया कि न्याय की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन अंततः सच्चाई और कानून की ही जीत होती है।
