नए साल में भारी संख्या में लोग पिकनिक मनाने पहुंचे रहे, रजरप्पा भी अपने आने वाले मेहमानों के स्वागत में तैयार है

वैसे तो रजरप्पा का महत्व माँ छिन्नमस्तिका की धरती के कारण प्रसिद्ध है। मगर यहाँ प्रकृति भी अपनी अमिट छाप छोड़ जाती है। कल कल करते झरने हो या घटा बिखेरती मनोरम दृश्य। यह बरबस ही यहाँ आनेवाले सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती है। यही कारण है कि नये साल में भारी संख्या में यहाँ पर्यटक पिकनिक मनाने पहुँचते हैं। रजरप्पा भी अपने आनेवाले मेहमानों के स्वागत में तैयार है।


रजरप्पा जहाँ कण कण में माँ भगवती का वास माना जाता है। वैसे तो यहाँ सालों भर श्रद्धालु माँ छिन्नमस्तिका के दर्शन को पहुँचते हैं। मगर नये साल में देश-विदेश से पर्यटक यहाँ पिकनिक मनाने आते हैं। यहाँ की मनोरम दृश्य देखकर बार-बार आने को जी करता है। पश्चिम बंगाल से सपरिवार यहाँ पिकनिक मनाने आये एक पर्यटक ने बताया कि रजरप्पा में माँ छिन्नमस्तिका के दर्शन के साथ – साथ प्रकृति को भी निहारने का आनंद मिलता है। 


श्रद्धालु

वहीँ रजरप्पा मन्दिर के पुजारी असीम पंडा ने कहा कि नये साल में लोग माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। ताकि सालों भर माँ भगवती की कृपा बनी रहे। साथ ही पिकनिक का भी आनंद उठा लेते हैं।

असीम पंडा, पुजारी, रजरप्पा मंदिर

रजरप्पा में सैलानियों के आने से जीविका के भी साधन बनने लगे हैं। यहाँ नौका चलाकर अपनी व परिवार की आमदनी का जुगाड़ करनेवाले एक नाविक ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते पेट भरना मुश्किल हो गया था। लेकिन भारी संख्या में सैलानियों के रजरप्पा पहुँचने से अब आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।

नाविक

रजरप्पा में सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी का कारण है कि यहाँ भगवती के दर्शन के साथ साथ कई मनोरम स्थल लोगों को खूब लुभाती है। जरूरत है इसमें सरकार की सकारात्मक पहल की। जिससे इसकी खूबसूरती में और चारचांद लग सके।

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