ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज एसोसिएशन द्वारा सरकार के नीतियों के विरोध में हड़ताल

शहर के सभी बैंक कर्मचारियों द्वारा हड़ताल किया जा था है उनका कहना है कि इस हड़ताल में 20 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने का अनुमान है । केंद्र सरकार की जो नीतियों के चलते संकट गहराता जा रहा है, अर्थव्यवस्था सुस्त हो गई है और दरिद्र की स्थिति बन गई है । बेरोजगारी 45 वर्षों में सबसे खराब स्तर पर है करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं तीन विरोधी कानून को संसद में पारित कराकर करोड़ों असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को कानूनी सुरक्षा से बाहर करके दास्तां की स्थिति उत्पन्न कर दी गई है । कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी दिए बगैर सरकार ने तीन कृषि बिलों को पारित किया है । इसके द्वारा सरकार ने अनुबंध खेती देशी और विदेशी खुदरा एकाधिकार को बढ़ावा देकर देश की खाद्य सुरक्षा को संकट में डाल दिया है सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 100% एफडीआई के माध्यम से निजी कारण एवं नीलामी का उम्मीद खेल खेला जा रहा है कोविड-19 के अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं को लाल एवं बीमा लाभ नहीं दिया जा रहा है ऐसी विकट परिस्थितियों में नई शिक्षा नीति पेश की गई है जो गरीब लोगों के प्रति भेदभाव एवं शिक्षा का थोक निजी करण है जीएसटी दोषपूर्ण सूत्री करण की नीति से राज्यों की वित्तीय स्थिति संकट में आ गई है ।

वहीं सरकारी बैंकों में आम जनता और वरिष्ठ नागरिक अपने भविष्य की सुरक्षा एवं जरूरतों के लिए बचत के पैसे रखते हैं अतः सरकार भी कई कल्याणकारी योजनाएं चलाती है बड़े-बड़े अभिकरण घराने इन बैंकों से कर्ज लेकर चुकाते नहीं बल्कि कुछ तो देश से भी फरार हो गए हैं दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के बैंक बड़े-बड़े खातेदारों की सेवा सिर्फ मुनाफाखोरी के लिए करते हैं इन बड़े कर्जदारो से वसूली के बजाय सरकार इन बैंकों का विलय एवं निजी करण के प्रयास में लगी है इसे जमा कर्ताओं की जमा पूंजी खतरे में पड़ सकती है आज जरूरत है बैंकों के पद का दर बढ़ाने का भारी संख्या में बेरोजगारी को नियुक्त करने का ।
अब तक पंचवर्षीय योजनाओं में 5576113 करोड़ रुपए और सामाजिक सुरक्षा के 3069942 करोड़ रुपए लगाने वाला एलआईसी आत्मनिर्भर भारत का उत्कृष्ट मिसाल है । गांव को कोने-कोने तक व्यक्तिगत एवं सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने वाले एलआईसी का एक हिस्सा निजी हाथों में सौंपने की साजिश चल रही है । अपना 100% लाभ बीमा धारकों एवं सरकार को समर्पित करने वाले एलआईसी का शेयर यदि बेचा जाएगा तो उसे भी मुनाफाखोरी में शामिल होकर कल्याणकारी एवं देश के विकास में पैसा लगाने से हाथ खींचना पड़ेगा । सरकार को बैग एवं एलआईसी के निजी करण से पीछे धकेलना जनहित में अति आवश्यक है ।

उन्होंने कहा कि यह आम हड़ताल सरकार से मांग करता है सभी गैर आयकर दाताओं को प्रतिमाह 7500 रुपए प्रदान करें, जरूरतमंदों को 10 किलो मुफ्त राशन मिले, ग्रामीण क्षेत्रों में साल में 200 दिनों का काम मिले, शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी का विस्तार हो, सभी मजदूर एवं किसान विरोधी कानून वापस लिए जाएं, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगे और सभी को पेंशन मिले तथा नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल हो । यह हड़ताल जनहित के लिए है । सभी लोगों से अपील है कि वह अपने स्तर से अपने तरीके से इस हड़ताल का जोरदार समर्थन करें ।

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