झारखंड बने 22 साल बीत चुके हैं सरकारें आयीं- गयीं. इन 22 सालों में झारखंड में बहुत कुछ बदलते देखा. सियासत के गलियारों से लेकर लाल आतंक का तांडव तक झारखंडियों ने देखा है. हर सियासत के केंद्र बिंदु यहां के आदिवासी और मूलवासी रहे हैं. आदिवासियों और मूल वासियों के नाम पर सियासतदान न जाने कितनी बार झारखंड को लूट चुके हैं. जिन आदिवासियों और मूल वासियों के दम पर राज्य के सत्ता की बिसात बिछी, आज उन आदिवासियों और मूल वासियों की जमीनी सच्चाई जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे…..
पहले आप इन तस्वीरों को देखिए फिर हम आपको बताएंगे यहां की जमीनी हकीकत…….
देखा आपने यह तस्वीरें हैं झारखंड की सबसे बड़ी ओधोगिक क्षेत्र के ग्रामीण इलाके की. ये तस्वीर सरायकेला विधानसभा क्षेत्र के गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र के कालिकापुर पंचायत के सालडीह गांव का है. मगर विकास कहां है. इन तस्वीरों को देखकर समझिए. महज 1 घंटे भी तेज़ बारिश होती है तो तालाब बन जाता है ये सड़क नतीजा आप साफ़ देख सकते हैं. किस तरह 20 घरों की इस गांव के लोग नारकीय जिंदगी जीने को विवश है. ये आदिवासी- मूलवासी ही तो हैं… फिर किसके लिए झारखंड और कैसी सियासत !
ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है. सड़क पर फिसलन और दलदली मिट्टी होने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब गांव के बच्चे स्कूल जाते हैं या फिर कोई बीमार पड़ जाता है. कई बार जनप्रतिनिधियों के पास फरियाद भी लगाई, लेकिन सभी चुनावी वायदे बनकर रह गए. चुनाव जीतने के बाद दोबारा गांव की तरफ झांकने भी नहीं आए. कई बार फिसल कर ग्रामीण घायल भी हो चुके हैं. ओर तो ओर बरसात के समय ग्रामीण घर छोड़कर लोग रिश्तेदारों के यहाँ चले जाते है कारण ज्यादा बारिश होती है तो घर टूटने का संभावना रहता है तथा कई घर टूट भी जा चुका है।
कालिकापुर पंचायत के आदिवासी बहुल सालडीह गांव में करीब तीन वर्ष से उत्पन्न जलजमाव की समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है. जल जमाव से प्रभावित परिवार के सदस्यों ने प्रदर्शन कर आक्रोश प्रकट किया. साथ ही समाधान नहीं होने पर प्रखंड कार्यालय में सभी परिवार विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी. महिलाओं ने बताया कि जनप्रतिनिधियों से लगातार फरियाद के बाद भी समाधान नहीं हुई।
गांव में जल जमाव की वजह से उक्त टोला तालाब में तबदील हो गया है. कई घर क्षतिग्रस्त हो गये है. जल जमाव की वजह से घरों तक सांप बिच्छुओं के आने का खतरा बना रहता है. वहीं भाड़ेदार भी पलायन कर रहे है. बरहाल अब देखना है कि सरकार तथा स्थानिय जनप्रतिनिधियों की नीद कब खुलती है और पानी से कब बचाती है नही…….
रिपोर्ट;सरायकेला हेड से दयाल लायक
मोबाइल नंबर-7903311340
