
जमशेदपुर। झारखंड एबोरिजिनल घासी ऑर्गेनाइजेशन ने टाटा स्टील प्रबंधन के अधीन विभिन्न इकाइयों और कंपनियों में वर्षों से कार्यरत सफाई एवं सेनिटेशन कर्मियों को स्थायी करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री झारखंड और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि टाटा स्टील, टीएमएच, टाटा मोटर्स अस्पताल, टिनप्लेट अस्पताल, टाटा मोटर्स, जुबली पार्क, जुस्को स्कूल समेत कई इकाइयों में सफाई और सेनिटेशन का कार्य ठेका प्रथा के तहत कराया जा रहा है, जबकि यह पूरी तरह स्थायी प्रकृति का कार्य है।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि सफाई व्यवस्था किसी भी संस्थान के लिए अत्यंत आवश्यक सेवा है। यदि एक दिन भी यह कार्य बाधित हो जाए तो गंदगी फैलने के साथ-साथ बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके बावजूद इन कार्यों में लगे मजदूरों को ठेकेदारों के माध्यम से काम कराया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि टाटा कंपनी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही सफाई और सेनिटेशन के कार्यों में लगे मजदूर स्थायी कर्मचारी हुआ करते थे। उन्हें आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती थीं। संगठन का दावा है कि इन कार्यों में शुरू से ही घासी और आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में जुड़े रहे हैं। वर्तमान में भी इन्हीं समुदायों के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस कार्य को कर रहे हैं, लेकिन अब वे ठेका मजदूर के रूप में कार्य करने को मजबूर हैं।
संगठन ने मांग की है कि लंबे समय से कार्यरत सफाई एवं सेनिटेशन कर्मियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए तथा उन्हें पूर्व की भांति आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य श्रमिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही ठेका प्रथा समाप्त कर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप कर मजदूरों के हित में उचित निर्णय लेने की अपील की है।