
जमशेदपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनकी सम्मानित पत्नी के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में तंजीम अहल-ए-सुन्नत व जमात की ओर से गुरुवार को प्रदर्शन कर गृह मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भेजते हुए संबंधित मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ रहते हैं। संगठन का आरोप है कि पिछले कुछ समय से कुछ लोग विभिन्न धर्मों, विशेषकर इस्लाम धर्म, उसकी धार्मिक मान्यताओं और पूजनीय व्यक्तित्वों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इससे देश की गंगा-जमुनी संस्कृति और आपसी भाईचारे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
संगठन ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि हाल ही में नाजिया इलाही द्वारा पैगंबर मोहम्मद साहब और उनकी पत्नी के संबंध में की गई कथित टिप्पणी से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर और निष्पक्ष कार्रवाई होना आवश्यक है ताकि किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
तंजीम अहल-ए-सुन्नत व जमात के पदाधिकारियों ने कहा कि पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुरूप दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का सम्मानपूर्वक पालन करने का अधिकार देता है और किसी भी धर्म या उसके पूजनीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।