पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, पंडवानी गायन की अमर आवाज हुई खामोश

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रायपुर छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. तीजन बाई ने अपने अद्भुत गायन और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी लोक कला को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर करोड़ों लोगों का दिल जीता। उनके योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म विभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं।”
डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश ने लोक संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर को खो दिया है। उनकी बुलंद आवाज, अद्वितीय प्रस्तुति और कला के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। भारतीय लोक संगीत और पंडवानी परंपरा में उनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।

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