
चतरा जिले से एक रूह कंपा देने वाली व शर्मशार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने गुरु-शिष्य जैसे पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर दिया है। जिस शिक्षक पर बच्चों को शिक्षा और संस्कार देने की जिम्मेदारी थी, उसी पर तीसरी कक्षा की मासूम छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला एक अनुसूचित जनजाति आवासीय बालिका प्राथमिक विद्यालय का है, जहां पदस्थ शिक्षक शंकर प्रसाद (उम्र लगभग 50 वर्ष) ने अपनी मर्यादा को तार-तार करते हुए मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाया। इस घिनौने कृत्य का खुलासा तब हुआ, जब नाबालिग छात्रा गर्भवती पाई गई।
जानकारी के अनुसार, छात्रा अचानक आवासीय विद्यालय से घर लौट आई थी। इस दौरान ग्रामीण महिलाओं ने उसके शरीर में हो रहे बदलाव को देखा। पूछने पर बच्ची ने अस्वस्थता की बात कही, जिसके बाद परिजनों ने एक स्थानीय चिकित्सक को बुलाया जब स्थानीय चिकित्सक द्वारा जांच की गई, तो प्रेगनेंसी किट से गर्भवती होने की पुष्टि हुई। यह खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
आक्रोशित ग्रामीण बच्ची को लेकरओ विद्यालय पहुंचे और जमकर विरोध जताया। सूचना मिलते ही हंटरगंज थाना प्रभारी प्रभात कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी शिक्षक को मौके से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में हंटरगंज थाना को ख्याओ 47/2026, दिनांक 09.04.2026 के तहत भारतीय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट (POCSO) एवं एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर इस कांड के प्राथमिक अभियुक्त त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया । ओ
जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है। उपायुक्त के निर्देश पर आरोपी शिक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। जांच प्रक्रिया में महिला थाना, बाल कल्याण समिति (CWC) एवं संबंधित विभागों को शामिल किया गया है, ताकि पीड़िता को न्याय दिलाया जा सके। इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी प्रभात कुमार, एसआई नितेश कुमार प्रसाद, महिला थाना प्रभारी सुषमा कुमारी सहित पुलिस टीम की सक्रिय भूमिका रही।
सर्मसार करने वाली इस घटना की जानकारी के बाद से पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कठोरतम सजा और स्थायी सेवा समाप्ति की मांग करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के विश्वास और बच्चों की सुरक्षा पर गहरा हमला है। अब सबकी नजर प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर है कि पीड़िता को जल्द न्याय मिले और दोषी को ऐसी सजा मिले, कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो ।
