
दरअसल ये सभी आदिवासी उपभोक्ता हैं. इनका आरोप है कि विभाग के अधिकारियों के इशारे पर उनपर बिजली चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज कर परेशान किया जा रहा है. बार- बार उनपर मामला दर्ज किया जा रहा है. जुर्माना भरने के बाद भी केस दर्ज किया जा रहा है. उपभोक्ताओं ने बताया कि उनसे बिजली कनेक्शन बहाल करने के एवज में आधार कार्ड लिया गया और पुलिस को भेजकर केस दर्ज करने की जानकारी दी गयी. उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर विभाग के अधिकारियों के इशारे पर कर्मी उन्हें बार-बार परेशान कर रहे हैं. इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया मगर अपने कार्यालय से सभी अधिकारी और कर्मी नदारत मिले. मामला चाहे जो भी हो. एक तरफ झारखंड सरकार आदिवासियों को मुफ्त बिजली देने की बात करती है दूसरी तरफ विभाग के कर्मी आदिवासी उपभोक्ताओं को परेशान कर रहे है. मामले में क्या सच्चाई है यह तो विभाग के अधिकारियों के सामने आने के बाद ही पता चल सकेगा. फिलहाल उपभोक्ताओं की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार को दिन भर उपभोक्ता बिजली विभाग के कार्यालय में ताला बंद कर अधिकारियों एवं कर्मियों को बंधक बनाए रखा.
