
जमशेदपुर: श्री श्री शीतला माता मंदिर महंत बलदेव दास अखाड़ा, साकची, जमशेदपुर द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य रामनवमी महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है। यह धार्मिक आयोजन 30 मार्च 2025 से 7 अप्रैल 2025 तक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होगा। यह महोत्सव शीतला मंदिर, साकची में पिछले 40 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है।
कार्यक्रम का विस्तृत विवरण
संपूर्ण रामायण पाठ – इस महोत्सव के अंतर्गत 2 अप्रैल से 3 अप्रैल 2025 तक संपूर्ण रामायण पाठ का आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें भक्तों को भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र एवं आदर्शों का श्रवण करने का शुभ अवसर प्राप्त होगा।
भव्य कलश यात्रा एवं आतिशबाजी – 4 अप्रैल 2025 को संध्या 5:00 बजे एक भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कलश धारण कर मंगलमय वातावरण का निर्माण करेंगी। इसके साथ ही श्रीराम के जयघोष एवं भव्य आतिशबाजी से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठेगा।
अष्टमी महाभोग एवं संध्या कीर्तन- 5 अप्रैल 2025, दोपहर 1:00 बजे से अष्टमी महाभोग का आयोजन किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भंडारे का लाभ मिलेगा। इसके पश्चात संध्या 6:00 बजे से भक्ति संध्या का आयोजन होगा, जिसमें भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्त भगवान श्रीराम की आराधना करेंगे।
महानवमी पूजा एवं महाभोग – 6 अप्रैल 2025, दोपहर 1:00 बजे से महानवमी पूजा एवं महाभोग का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भक्तगण विशेष पूजा एवं भंडारे में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
महादशमी भव्य शोभायात्रा एवं विसर्जन – 7 अप्रैल 2025, संध्या 5:00 बजे से भव्य शोभायात्रा एवं रामनवमी विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में रायपुर (छत्तीसगढ़) से धमाल नामक डंका पार्टी, बलरामपुर से छाऊ नृत्य कलाकार, एवं पुरुलिया से अखाड़ा के खिलाड़ी विशेष प्रस्तुति देंगे।
आज के प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से उपस्थित होने वालों में :
मुख्य संरक्षक मुकेश मित्तल जी,अध्यक्ष अरविंद साव जी,अन्य प्रमुख सदस्य: विनय खुराना, संरक्षक अंकुश जवानपुरिया, उपाध्यक्श, मनोज बाजपेयी, सचिव राकी सिंह, नवीन मिश्रा, रितेश बाजपेयी,अमन बाजपेयी, मनोज दास, मंगल मंडल, कुमार शुभम,प्रताप साहू
यह भव्य रामनवमी महोत्सव न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला आयोजन है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा एवं धार्मिक एकता का भी प्रतीक है। हम सभी श्रद्धालु भक्तों से आग्रह करते हैं कि इस पवित्र अनुष्ठान में सम्मिलित होकर धर्म और भक्ति का लाभ उठाएं।