
इस दौरान मंच से जुड़े सदस्यों ने एक स्वर में अपनी मांगों और प्रस्तावों को राज्य के मुख्यमंत्री के समक्ष रखने पर सहमति जताई. सभा में वक्ताओं ने कहा कि पूर्व में जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं थी, लेकिन वर्तमान में खतियान की अनिवार्य मांग के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मंच के सदस्यों का कहना था कि इससे विशेषकर ओबीसी समाज के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. भारतीय ओबीसी विचार मंच ने मांग की कि जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए स्थानीय स्तर पर एक जांच समिति का गठन किया जाए. उन्होंने कहा कि स्थानीय जांच के आधार पर ही जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े. मंच के सदस्यों ने बताया कि इस संबंध में एक मांग पत्र तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा. सभा के दौरान बड़ी संख्या में मंच से जुड़े लोग उपस्थित रहे और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई.
