राजकीय शोक के दिन टाटा कंपनी की कार्रवाई – अंचल कर्मियों की मौजूदगी पर सवाल

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झारखंड के वरिष्ठ नेता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के निधन के बाद राज्य सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। पूरे राज्य में शांति और श्रद्धांजलि का माहौल है, सरकारी दफ्तर बंद हैं। लेकिन इसी बीच मिर्जाडीह गांव में टाटा कंपनी की गतिविधियों ने लोगों को हैरान कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि टाटा कंपनी कुछ अंचल और जिओ ऑफिस के कर्मचारियों को साथ लेकर गाँव आई और जमीन की नापी करने की कोशिश की। जबकि वही जमीन सरकार ने पहले ही गांव के 16 लोगों के नाम बंदोबस्त कर दी है और ग्रामीणों के पास उसकी रसीद और कागजात मौजूद हैं।

जब ग्रामीणों ने कर्मचारियों से पूछा कि क्या आपके पास जमीन तोड़ने या मुआयना करने का कोई सरकारी नोटिस है, तो कोई जवाब नहीं मिला। सब चुप हो गए। इससे साफ पता चलता है कि यह कार्रवाई बिना वैध आदेश के की जा रही थी, और संभव है कि टाटा कंपनी के दबाव में की गई हो।

इससे कुछ जरूरी सवाल खड़े होते हैं:

जब राज्य में शोक चल रहा है, तो सरकारी कर्मचारी गाँव में किस आदेश पर पहुँचे?

क्या अब सरकारी दफ्तर टाटा कंपनी के इशारों पर चलने लगे हैं?

क्या राजकीय शोक केवल दिखावे के लिए होता है?

ग्रामीणों की माँग है:

  1. इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो और पता लगाया जाए कि कर्मचारियों को किसने भेजा।
  2. राजकीय शोक के दौरान ऐसी कार्रवाई करने पर टाटा कंपनी से जवाब माँगा जाए।
  3. ग्रामीणों को उनकी ज़मीन का कानूनी हक़ दिया जाए।
  4. प्रशासन इस तरह की दबाव वाली कार्रवाई को तुरंत रोके।

अगर शोक के समय भी निजी कंपनियाँ सरकारी कर्मचारियों को अपने हित में इस्तेमाल कर सकती हैं, तो यह बहुत ही गंभीर बात है। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, यह झारखंड की अस्मिता और आदिवासियों के अधिकार का मामला है।

गाँव के लोग इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

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