
बताते चले कि आज 15 जुलाई को शाम 7.03 बजे बोकारो होगा 3 मिनट के लिए ब्लैकआउट. तीन मिनट तक बंद रहेंगी लाइट और गाड़ियों की हेडलाइट. घबराइए नहीं ये मॉक ड्रिल होने जा रहा है. इस मॉक ड्रिल में वो सारी परिस्थितियां होगी जो युद्ध जैसे हालात में होते है। सायरन बजेगा, एम्बुलेंस होंगे और अस्पताल होंगे। बोकारो जिला प्रशासन ने दो जगहों को इसके लिए चिन्हित किया है जिसमें ऊषा पेट्रोल पंप और सेक्टर 12 स्थित मेडिकेंट हॉस्पिटल। शाम 7.03 मिनट से 3 मिनट के लिए पूरा बोकारो अंधेरा में डूब जाएगा और इस दौरान मोबाइल से लेकर घरों के इन्वर्टर की लाइटें तक पूरी तरह से बंद रहेगी। बोकारो उपायुक्त ने कहा है कि घबराए नहीं ये केवल मॉक ड्रिल है।
बोकारो उपायुक्त ने कहा कि ये ऊषा पेट्रोल पंप और सेक्टर 12 स्थित मेडिकेंट हॉस्पिटल में किया जाएगा। अभ्यास के दौरान एयर रेड, बम विस्फोट तथा राहत एवं बचाव अभियान का वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आपदा की सूचना मिलने पर दो मिनट तक रुक – रुककर सायरन बजाया जाएगा जो संभावित आपदा का संकेत होगा। वहीं मॉक ड्रिल समाप्त होने पर एक लंबा सायरन बजाया जाएगा जो खतरे के समाप्त होने का संकेत होगा।
घायलों के उपचार एवं आपातकालीन व्यवस्था पर रहेगी पूरी तैयारी।
मॉक ड्रिल के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा जहां सबसे पहले उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक पहुंचकर पूरी गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इस दौरान इमरजेंसी मास कॉलिंग सिस्टम की भी व्यवस्था होगी।
घायलों को अस्पताल में पहुंचाने की भी व्यवस्था पूरी तरह से रियल की तरह किया जाएगा। इमरजेंसी सेवा, अस्पतालों में स्ट्रेचर और डॉक्टर की व्यवस्था ताकि इन हालातों से निपटने की पूरी तैयारी को पूरी तरह से मॉक ड्रिल के माध्यम से पूरी तरह से रियल करने का रिहर्सल किया जाएगा।
साथ ही इस दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रूप से गाइड करने और नियंत्रण करने के लिए यातायात पुलिस की व्यवस्था की जाएगी।
बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा और एसपी नाथू सिंह मीणा ने कहा कि लोगो को घबराने की जरूरत नहीं ये सिर्फ मॉक ड्रिल है ताकि लोगो को आपदा से निपटने के लिए हर वक्त तैयार रहने की ट्रेनिंग के तौर पर दी जाती है। आम नागरिक भी सिविल डिफेंस की तरह होता है और जब ऐसे हालात पैदा हो जाते है तो उस परिस्थिति से कैसे निपटा जाए यह आम लोगों को जानकारी रहनी चाहिए इसलिए इस तरह का मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है। उनसे जब पूछा गया कि अस्पताल को क्यों चुने तो उन्होंने कहा कि युद्ध में अस्पताल को निशाना नहीं बनाया जाता है लेकिन अभी के युद्ध में जिस तरीके से देखा जा रहा है कि अस्पतालों को भी निशाना बनाते हुए देखा गया है ऐसे में अस्पताल को भी मॉक ड्रिल का हिस्सा बनाया गया है।