
रामगढ़ जिला से सटे बोकारो जिले के महुआटांड़ थाना क्षेत्र में गजराज का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते दो दिनों में हाथियों के हमले में एक तीन वर्षीय मासूम सहित कुल पाँच लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। इसके बावजूद वन विभाग हाथियों को गांव से बाहर खदेड़ने और सुरक्षित वन क्षेत्र में पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है।
एक दिन पहले हाथियों ने गांव से बाहर निकले तीन बुजुर्गों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था। वहीं आज महुआटांड़ थाना क्षेत्र के गंगपुर गांव में चार से पांच हाथियों ने सोमर साव के घर पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए घर में मौजूद लोग बच्चों समेत छत की ओर भागे, लेकिन हाथियों ने पूरे परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस हमले में तीन वर्षीय अमन साव और सोमर साव की मौत हो गई, जबकि उसी परिवार के तीन बच्चे और एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गए।
मृतक के परिजन भोला साव ने बताया कि हाथियों ने अचानक घर पर हमला किया और भागने तक का मौका नहीं मिला।
परिजन शैलेश कुमार महतो ने इस त्रासदी के लिए क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन और जंगलों की अंधाधुंध कटाई को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर नष्ट होने से वे गांवों में घुस रहे हैं और जान-माल व फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
गांव के रवि महतो ने बताया कि पिछले छह महीनों से हाथियों का झुंड रामगढ़–बोकारो सीमावर्ती इलाकों में डेरा डाले हुए है, लेकिन वन विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है।
घायलों को रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सदर अस्पताल के डॉक्टर रविंद्र कुमार ने बताया कि एक तीन वर्षीय बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जबकि चार घायलों का उपचार जारी है।
मृतक व घायल:
मृतक—अमन साव (3) | घायल—शांति देवी (50), आयुष (8), राशि (12), राहुल (10)
लगातार घटनाओं के बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि हाथियों को सुरक्षित वन क्षेत्र में कब तक पहुंचाया जाता है।
