मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा ने बीसीसीएल के खिलाफ हुए गोलबंद,रेभ्न्यु शेयरिंग के तहत आउटसोर्सिंग कम्पनी को जमीन देने से किया इनकार,विधानसभा ध्यानाकर्षण समिति अध्यक्ष ग्रामीणों के पक्ष में आये,केंद्र सरकार और बीसीसीएल पर बोला हमला

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धनबाद जिले के बीसीसीएल बरोरा एरिया 01 अंतर्गत मधुबन में इंदु आउटसोर्सिंग कम्पनी को कोयला खनन का कार्य मिला है।जिसे लेकर बीसीसीएल जमीन अधिग्रहण करने की प्रक्रिया कर रही है।लेकिन ग्रामीण बीसीसीएल के रेभ्न्यु शेयरिंग माइनिंग के तहत अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया है।ग्रामीण इसे लेकर पूर्व में आंदोलन करते हुए क्षेत्रीय कार्यालय में प्रदर्शन कर फैसला नही मानने की चेतावनी दिया था।ग्रामीणों का कहना है कि जमीन सीधे बीसीसीएल को देंगे,उसके बदले मुवाबजा और नियोजन बीसीसीएल दे।लेकिन नई पॉलिसी में जमीन का मुवाबजा आउटसोर्सिंग कम्पनी देगी और मुवाबजा भी।जो मंजूर नही है।
हालांकि ऐसा पहली बार है कि बीसीसीएल जमीन अधिग्रहण कर आउटसोर्सिंग कम्पनी को देगी।उसके बाद आउटसोर्सिंग कम्पनी खुद रैयत को विस्थापित करेगी,कम्पनी में नियोजन और मुवाबजा देगी।
मधुबन बचाव संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आधा दर्जन गाँव के ग्रामीण एकजुट होकर बीसीसीएल के खिलाफ गोलबंद होते हुए आंदोलन पर उतर गए है।
मधुबन बचाव संघर्ष मोर्चा के आंदोलन का समर्थन विधानसभा ध्यानाकर्षण समिति अध्यक्ष सह टुंडी विधायक मथुरा महतो,विधायक अरूप चटर्जी ने किया है।पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो ग्रामीणों के आंदोलन का नेतृत्व करते हुए एकजुट होकर डटे रहने का आह्वान कर रहे है।
वही विधानसभा ध्यानाकर्षण समिति अध्यक्ष ने कहा कि मधुबन बचाव संघर्ष मोर्चा के आंदोलन के साथ है।वे सभी अपना आंदोलन जारी रखे सड़क से सदन तक उनके साथ है।केंद्र सरकार ने ऐसी नीति लाई है जिसके तहत रैयतों की जमीन इंदु आउटसोर्सिंग को देगी।जिसका समिति विरोध कर रही है।केंद्र सरकार की मंशा किसानों,रैयतों मजदूरों के खिलाफ है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जो विजन है उसे जनता तक ले जाने का काम कर रहे है।

निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि कोल इंडिया ने रेभ्न्यु शेयरिंग माइनिंग लाई है जिसका वे सभी विरोध कर रहे है।रैयत बीसीसीएल को जमीन रजिस्ट्री करती है तो बीसीसीएल में विस्थापित को मुवाबजा और बीसीसीएल में नोकरी मिलेगी।लेकिन आउटसोर्सिंग कम्पनी को बीसीसीएल जमीन देती है विस्थापित करती है तो इसका विरोध करेंगे।केंद्र सरकार व कोलइंडिया की नई पॉलिसी निजीकरण की तरफ ले जाने की है।

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