सरकार जहां निर निर्मल परियोजना और जल परियोजना जैसे कई योजना चलाकर घर घर सुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य कर रही है, वहीं आज भी ग्रामीण पुरखों का कुंए से गंदे पानी पीने को मजबूर, देखे रिपोर्ट

सरायकेला-खरसवां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र का सोङो गांव की हाल भी कुछ ऐसा है – सोङो गांव के ग्रामीण सिंचाई के लिए बने एक खेत मे पुरखो से बने एक सिंचाई कुंआं का पानी पीने को मजबूर है। गांव की करीब डेढ सौ परिवार के महिलाएं और बालाएं खेत मे बने उस कुंए मे घंटों इंतजार कर पानी भरती है। कुंए मे दिन भर महिलाओं की भीङ लगी रहती है। गांव से करीब आधा किलोमीटर दुर खेत मे बने कुंए का पानी ढो कर परिवार का प्यास बुझाते हैं । इस गांव मे करीब डेढ सौ परिवार के लिए न चापाकल है न जल मिनार। ग्रामीणों का एक मात्र पेय जल का साधन यही कुंआं है। स्कूलों मे पङ रही लङकियाँ भी अपने परिजनों का प्यास बुझाने के लिए घंटों इंतजार कर पानी भरती है और सर पर ढो कर पानी घर ले जाती है। लङकियाँ बताती है की एक ही कुंए से जल भरने मे घंटों इंतजार करना पङता है, जिससे सुबह साम पढाई मे भी बाधा उत्पन्न होता है। अभी तो गर्मी प्रारम्भ हुआ है और उस कुंआं का पानी गर्मी के दिनों मे घट जाता है। पानी घटने से सुबह चार बजते ही लाइन लगाना पङता है। इस संबंध मे मुखिया प्रतिनिधि सह ग्राम प्रधान नयन सिंह मुण्डा बताते हैं की कुरमाडीह गांव मे बृहत जलमिनार बनाने का योजना है, जिससे पाइपलाइन के द्वारा पुरे पंचायत को पानी दिया जाएगा। आखिर कब तक सरकारी बाबुओं और जन प्रतिनिधियों का आस्वासन पर ही ग्रामीणों को पेय जल संकट से जुझना पङेगा।

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