पांच दिन बैंकिंग की मांग पर जमशेदपुर में भी बैंककर्मी हड़ताल पर, करोड़ों का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान

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UFBU के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल. सरकारी बैंकों में कामकाज पर व्यापक असर, 28 से 30 सितंबर फिर हड़ताल और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

जमशेदपुर: पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को देशभर के बैंककर्मी हड़ताल पर हैं. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान का असर जमशेदपुर में भी देखने को मिल रहा है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शाखा स्तर का कामकाज प्रभावित है. गौरतलब है कि देशव्यापी स्तर पर UFBU से जुड़े संगठन करीब 90 प्रतिशत बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. हड़ताल का सबसे बड़ा मुद्दा सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग लागू करने की मांग है. बैंक यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 के 12वें द्विपक्षीय समझौते के दौरान इस दिशा में सहमति बनने के बावजूद व्यवस्था अब तक लागू नहीं हुई. इसके अलावा संशोधित Performance Linked Incentive यानी PLI व्यवस्था को लेकर भी यूनियनों का विरोध है. पेंशन और कर्मचारियों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा हैं. जमशेदपुर में शुक्रवार की हड़ताल से कितने करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ है, इसका कोई सत्यापित आधिकारिक आंकड़ा अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है इसलिए हड़ताल समाप्त होने के बाद बैंक यूनियनों या स्थानीय बैंक समन्वय संगठनों की ओर से क्लियरिंग और शाखागत लेन-देन के आधार पर आंकड़ा सामने आ सकता है. हालांकि जमशेदपुर जैसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक शहर में हड़ताल का असर नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरिंग, ड्राफ्ट, KYC, ऋण संबंधी कार्य और दूसरे शाखा आधारित लेन-देन पर पड़ रहा है. देशभर में भी इन्हीं सेवाओं के प्रभावित होने की बात सामने आई है. UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है. बैंक यूनियनों ने सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन पर दबाव बढ़ाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है. शुक्रवार की एकदिवसीय हड़ताल के बाद 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार तीन दिनों की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है. इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है. यानी शुक्रवार की हड़ताल केवल एक दिन के बैंक बंद रहने का मामला नहीं है. सरकार और बैंक यूनियनों के बीच पांच दिवसीय बैंकिंग और PLI समेत लंबित मुद्दों पर सहमति नहीं बनी तो सितंबर के आखिर और अक्टूबर में बैंकिंग सेवाओं पर कहीं अधिक व्यापक असर पड़ सकता है.

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