
M G Mअस्पताल के पीछे झाड़ियां मेंइस प्रकार के जानवर को देखने मिला गोह (इंडियन मॉनिटर लिज़र्ड) को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह जीव आमतौर पर इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होता। भारत में पाई जाने वाली इस बड़ी छिपकली को बंगाल मॉनिटर के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Varanus bengalensis है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गोह की लार में कुछ ऐसे तत्व पाए जा सकते हैं, जो काटने पर दर्द या सूजन पैदा कर सकते हैं, लेकिन यह विष मनुष्यों के लिए सामान्यतः घातक नहीं माना जाता। हालांकि किसी भी जंगली जीव की तरह इससे दूरी बनाए रखना और छेड़छाड़ नहीं करना ही बेहतर होता है।
गोह भारत के अधिकांश राज्यों में पाई जाती है। इसके अलावा नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है। यह प्रजाति जंगलों, खेतों, झाड़ियों, चट्टानी इलाकों तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बाहरी हिस्सों में आसानी से देखी जा सकती है।
आकार की बात करें तो एक वयस्क गोह की लंबाई लगभग 1 से 1.5 मीटर तक हो सकती है। इसका शरीर मजबूत, पूंछ लंबी और जीभ सांप की तरह दो भागों में विभाजित होती है। इसका रंग प्रायः भूरा, धूसर या जैतूनी होता है, जिस पर छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देते हैं।
यह एक मांसाहारी सरीसृप है और कीड़े-मकोड़े, चूहे, मेंढक, छोटे पक्षी, अंडे तथा अन्य छोटी छिपकलियों को अपना भोजन बनाती है। इसी कारण यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है।
भारत में गोह को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत सुरक्षा प्राप्त है। इसके शिकार, पकड़ने या अवैध व्यापार पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं गोह दिखाई दे तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।