
जमशेदपुर : टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। कंपनी प्रबंधन और वर्कर्स यूनियन के बीच शनिवार को हुए समझौते के तहत इस वर्ष कर्मचारियों को 12.3 प्रतिशत बोनस दिया जाएगा। बोनस की अधिकतम राशि ₹75,223 और औसत राशि ₹50,160 होगी। बोनस की राशि सात हजार कर्मचारियों को एक सितंबर को उनके वेतन के साथ दी जाएगी। इसके अलावा 148 अप्रेंटिस को स्थायी किया जाएगा। इनकी एक हफ्ते बाद मेडिकल जांच शुरू कर दी जाएगी। इन सभी को अर्का जैन विश्वविद्यालय से डिप्लोमा कराया जाएगा। इसके बाद अगर यह कर्मी बीटेक और एमबीए करना चाहते हैं तो काम करते हुए यह दोनों डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। अस्थाई कर्मचारियों को 8.33 प्रतिशत बोनस मिलेगा।
यह बोनस कंपनी के स्थायी कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों को दिया जाएगा। बोनस की राशि वेतन के साथ कर्मचारियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
375 कर्मियों की स्थायीकरण सूची अक्टूबर में जारी होगी
बोनस समझौते के साथ ही यह भी तय किया गया कि अगली बार 325 बाई सिक्स कर्मचारियों की स्थायीकरण सूची निकाली जाएगी। पहले यह संख्या 225 तय थी, लेकिन समझौते के दौरान 150 अतिरिक्त कर्मियों को शामिल करने पर सहमति बनी।
ज्ञात हो कि 25 जनवरी 2024 को रांची में श्रमायुक्त संजीव कुमार बेसरा और उप श्रमायुक्त राकेश प्रसाद की उपस्थिति में हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत तीन वर्षों में 2700 बाई सिक्स कर्मचारियों को स्थायी करने पर सहमति बनी थी।
बोनस समझौते पर इन अधिकारियों ने किए हस्ताक्षर
इस ऐतिहासिक समझौते पर टाटा मोटर्स प्रबंधन की ओर से प्लांट हेड रवींद्र, एचआर हेड, आइआर हेड, और लीगल हेड ने हस्ताक्षर किए।
वहीं वर्कर्स यूनियन की ओर से अध्यक्ष, महामंत्री आरके सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के बाद गाजे-बाजे के साथ मनाया गया जश्न
समझौते के तुरंत बाद कर्मचारियों में उत्साह की लहर दौड़ गई। यूनियन अध्यक्ष, महामंत्री आरके सिंह और सलाहकार प्रवीण सिंह का टाटा मोटर्स मुख्य गेट पर फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। जुलूस के रूप में सभी यूनियन कार्यालय पहुंचे, जहां कर्मचारियों को संबोधित भी किया गया।
आरके सिंह बोले – कर्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कटिबद्ध
इस अवसर पर यूनियन के महामंत्री आरके सिंह ने कहा कि, “यूनियन का प्रयास है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो, उनका भविष्य सुरक्षित रहे और उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो। इसी दिशा में लगातार प्रबंधन से संवाद करके समाधान निकाला जा रहा है।”
