ठंडे इलाके में पैदा होनेवाला स्ट्रॉबेरी अब झारखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र दुलमी प्रखण्ड में भी लाल होने लगा, प्रखण्ड के पांच गाँवों के टपक विधि से कई एकड़ में इसकी खेती कर किसान मालामाल हो रहे

ठंडे इलाके में पैदा होनेवाला स्ट्रॉबेरी अब झारखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र दुलमी प्रखण्ड में भी लाल होने लगा है। प्रखण्ड के पांच गाँवों के टपक विधि से कई एकड़ में इसकी खेती कर किसान मालामाल हो रहे हैं। 


आम तौर पर मनमोहक लाल स्ट्रॉबेरी ठंडे इलाके की पैदावार माना जाता है। लेकिन यह फल अब दुलमी के खेतों में भी अपनी लालीमा बिखेर रही है। दुलमी के किसानों ने अपनी मेहनत व लगन के बल पर यह कारनामा कर दिखाया है। प्रखण्ड के पाँच गाँवों जामसिंग, भैपुर,उसरा,गोडान्तु व कुसुमभा में किसानों ने कम पूँजी में इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इस संबंध में किसान हरीश कुमार ने बताया कि राँची ,बोकारो,रामगढ़ के बाजार में इसकी अच्छी माँग है। चार से पाँच सौ रुपये किलो तक इसकी माँग है।


हरीश कुमार (किसान)

वहीँ ग्रामीण क्षेत्र होने के नाते लोग इसको आँखों व हड्डियों के इलाज के लिये खेतों से ही खरीद कर ले जा रहे हैं। यह फल शुद्ध रूप में खेतों में मिल रहे हैं। इस ग्रामीण भी इसका लाभ उठा रहे हैं।


तारा देवी (ग्रामीण)

झारखंड में किसानों को मेहनत का सही दाम मिले तो सभी प्रकार की खेती कर उन्नत झारखंड बना सकते हैं। इसकी मिसाल दुलमी के किसानों ने कायम किया है। बस इनको भरोसा दिलाने की जरूरत है।

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