जंगली हाथियों को गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिये वन विभाग की और एक पहल

जमशेदपुर — पूर्वी सिंहभूम जिले के  सुदूरवर्ती गावँ घाटशिला, गालूडीह, एमजीएम, पटमदा और बोड़ाम इलाके में जंगली हाथियों का तांडव लगातार जारी है. जंगली हाथियों के कहर से ग्रामीणों की जान-माल की रक्षा के लिए जमशेदपुर वन प्रमंडल ने पचास से अधिक ड्रैगन लाइटें ख़रीदी हैं. जंगली हाथियों का झुंड गांव से भगाने के लिये ड्रैगन लाइट का प्रयोग किया जाएगा. पूर्वी सिंहभूम के सुदूरवर्ती गावँ पहाड़ों और तलहटियों पर बसे हैं. जिसके कारण सुदूरवर्ती क्षेत्रों में हांथियों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं प्राकृतिक संसाधनों और खूबसूरती से भरपूर झारखंड के दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, सरायकेला-खरसावां जिला और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला तक घिरा है. 193.22 वर्ग किलो मीटर में ऊंची-ऊंची पहाड़ों, गुफाओं और घने वृक्षों से आच्छादित दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है. घनघोर जंगल होने के कारण पश्चिम बंगाल, ओडिशा से हर साल हांथियों का यहाँ पलायन होता है. जिसके कारण कई बार हांथियों के झुंड आने से किसानों के फसल भी बर्बाद हो जाया करते हैं. कई बार हांथियों के आने से ग्रामीणों के जान पर खतरा भी मंडराता रहता है. पूर्वी सिंहभूम से सटे दलमा, चाकुलिया, बहरागोड़ा के ग्रामीणों की कई बार हाथी जान तक ले लेते है. इन हाथियों से बचने के लिए वन विभाग अब ड्रैगन लाइट का उपयोग कर रही है. जिसकी सहायता से लाल रंग की प्रकाश आने पर हाथी दूर भागेंगे. इसके साथ ही हांथियों को भगाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को उचित मानदेय पर नियुक्ति भी की गई है. हांथियों  के आतंक से निजात पाने के लिए वन प्रमंडल ने ड्रैगन लाइटें का उपयोग शुरू किया है.

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