साकची : मार्केट में रोज दुकान लगाने वाले मोचीयो पर आई संकट कहां गया दुकान हटाना पड़ा तो दुनिया से हट जायेंगे

साकची : जारी लॉकडाउन में सभी लोग परेशान हुए हैं। वहीं, रोज कमाने वाले और शाम को खाने वालों पर इस लॉकडाउन ने कहर बरपाया है। बात करें, लोगों के जूते चमका कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मोचियों की, तो उनकी स्थिति दयनीय हो चली है, लागू लॉकडाउन ने स्टेशन, बस स्डैंट और मार्केट पर दिखने वाले मोचियों को घर की राह दिखा दी, जो लॉकडाउन में अपने घर वापस नहीं लौट पाये उन्होंने फुटपाथ पर ही लॉकडाउन के दिन काट लिए, समाजिक संगठनों के बांटे जा रहे फूड पैकेट से अपने पेट की भूख मिटाते रहे हैं। लॉकडाउन के बाद मिली छूट के बाद ये अपनी दुकानें फिर से सजा रहे थे लेकिन हालात ऐसे बन गए की प्रशासन द्वारा इनके दुकानों को हटाया जा रहा, साकची मार्केट ऑफिस के समीप अपनी छोटी सी दुकान लगाकर गुज़ारा करने वाले मोचियों पर भी प्रशासन की नजर पड़ गई है, प्रशासन द्वारा अब इन्हें भी हटवाया जा रहा है, मोचियों का कहना की पीछले कई वर्षो से वे यहां दुकान लगाते आ रहे है मगर अब हमे हटवाया जा रहा है भला हमारे 2 गज के दुकानों से प्रशासन को क्या दिक्कत हो रही है। पहले सरकार हमें दुकान लगाने के लिए 10,000 का कर्ज देती है और फिर हमें दुकान नहीं लगाने देती आखिर हम सरकार का कर्ज कैसे चुकाएंगे, उनका कहना है कि उनका स्ट्रीट वेंडर कार्ड भी जेएनएसी द्वारा बनाया गया है मगर फिर भी उन्हें क्यों हटाया जा रहा है, सुनिए मोची की कहानी उन्हीं के जुबान से—-

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