भाजपा जिला कमेटी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता, बंदी को विफल करार देते हुए कहा गया की राजनीति रोटी सीखने के उद्देश्य से किया गया

केंद्र सरकार के नये कृषि कानून के खिलाफ महा गठबंधन द्वारा आहूत भारत बंद बेअसर रहा। आम जनता ने केंद्र सरकार के नये कृषि बिल का समर्थन कर बंद को विफल किया। झारखण्ड के किसानों को बदहाली में छोड़कर झारखण्ड सरकार सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगी है, यह बातें सिमडेगा जिला के भाजपा प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने विपक्ष के भारत बंद के विरोध में कहीं ।

भाजपा जिला कमेटी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया कि राज्य के किसान आउने पौने दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं, सरकार इनकी फसल को खरीदने को तैयार नहीं है। जबकि सरकार ने 2050 की एमएसपी निर्धारित की है।राज्य में 1362.78 करोड़ का कृषि बजट सरकार ने खुद घोषित किया था, लेकिन 8 मह में मात्र 73 करोड़ खर्च किया। कृषि को हेमंत सरकार अपने एजेंडे में सबसे उपर बताती हैं, लेकिन ये सब सिर्फ चुनाव का मंच तक ही सीमित है। बजट में 2000 करोड़ कर्ज माफी के लिए प्रावधान किया गया था, लेकिन ये जुमला ही साबित हुआ। झारखंड सरकार सिर्फ घोषणा करती हैं लेकिन उस पर कभी अमल नहीं करती है। रघुबर सरकार में किसान को एक मानदेय के तहत आर्थिक सहायता दिया जाता था लेकिन हेमंत सरकार ने सत्ता में आते ही उसे बंद कर दिया। जिससे किसान को मिल रहा सहायता भी बंद हो गया।

भाजपा जिला कमेटी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में बंदी को विफल करार देते हुए कहा गया की राजनीति रोटी सीखने के उद्देश्य से तमाम विपक्ष और महागठबंधन के लोग सड़कों पर उतरे जिनमें से एक भी किसान इस बिल के विरोध में आज सड़क पर नहीं उतरा।

शैलेंद्र सिंह, सिमडेगा , जिला प्रभारी

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