किसान आंदोलन के समर्थन मे विभिन्न सामाजिक – राजनैतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, कृषि बिल 2020 एंव नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया

किसान आंदोलन के समर्थन मे विभिन्न सामाजिक – राजनैतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, कृषि बिल 2020 एंव नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया।
लोगों ने नारा लगाया कि पूंजीपतियों का दलाली करना बंद करो, कृषि बिल वापस लो, सभी किसान एक हो, तीनों काला कानूनों को आपस लेना होगा।

किसान आंदोलन पर चर्चा की और किसान आंदोलन के साथ अपनी पूरी एकजुटता जाहिर की । किसान आंदोलन के साथ केन्द्र सरकार के जनतंत्र – विरोधी एवं दमनकारी बरताव की निन्दा की तथा सरकार से तीनों किसान विरोधी कानूनों को तत्काल वापस लेने की माँग की।
इन सबने आंदोलनकारी किसान द्वारा दिये गये 8 दिसम्बर के भारत बन्द कार्यक्रम को भी समर्थन दिया है ।


सभी बक्ताओं ने कहा कि तीनों कृषि विषयक कानून देश के तमाम किसानों के हित और अस्तित्व के खिलाफ हैं। किसानों के खेत , किसानों की फसलों और किसानों की आमदनी पर पूँजीपतियों के डाके और लूट की पूरी छूट देनेवाले ये कानून हैं । भले ही अभी यह आंदोलन अभी सरप्लस या बिक्री लायक उत्पादन करने वाले अंचलों में उमड़ा है , कालान्तर में सारे गाँवों और खेतों से यह आंदोलन फैलेगा।

ठेका खेती का कानून न केवल कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करेगा बल्कि अंतत: छोटे किसानों के हाथ से खेतों का स्वामित्व और नियंत्रण भी छीन लेगा।

इतना ही नहीं , ये कानून गैर – खेतिहर लोगों के लिए भी विनाशकारी है। जन वितरण प्रणाली , अन्त्योदय योजना जैसी सारी खाद्य सुरक्षा के कल्याणकारी कार्यक्रम खत्म हो जायेंगे। कुपोषण और भूख से मौत को रोकने की जिम्मेदारी से सरकार अपने को मुक्त कर लेगी। किसान आंदोलन इस खतरे के प्रति सचेत है । इसी कारण उसने अपनी माँग में जन वितरण प्रणाली का दायरा बढ़ाने की बात कही है। इसे देखते हुए बिना देर किये सभी गरीब जनों को भी इस आंदोलन के समर्थन में उतरना चाहिए।

आज जब कृषि और किसानों को विशेष सहयोग और संरक्षण की जरूरत है , पूँजीपतियों की लूट पर लगाम की जरूरत है , सरकार उल्टे किसानों से दुश्मनी और पूँजीपतियों से यारी निभा रही है । इसके खिलाफ हर न्यायप्रिय नागरिक को बोलना होगा।
श्रमिक संगठन , ट्रांसपोर्टर और अन्य समूह किसान आंदोलन के साथ आ रहे हैं , यह सकारात्मक एवं स्वागतयोग्य है। किसान आंदोलन भी श्रम कानूनों के श्रमिक – विरोधी संशोधनों के खिलाफ अपनी आवाज देगा और एक व्यापक मेहनतकश एकता का सूत्रधार बनेगा – ऐसी उम्मीद भी इस बयान में व्यक्त की गयी ।
मौके पर बाबू नाग, दीपक रंजीत, चंद्रशेखर टुडू, सुभाष कर्मकार, बिश्वनाथ, विश्वामित्र दास, दामू प्रामाणिक, जितु मुर्मू, बलोराम टुडू, स्वपन महतो, संतोष कुमार, निर्मल एंव बिलाश महतो आदि शामिल थे।

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